अधूरा मैं

क्या अधूरा हूँ मैं…ख़ुद से रूबरू अभी हुआ नहीं हूँ मैं; क्या अधूरा हूँ मैं…ख़ुद से रूबरू अभी हुआ नहीं हूँ मैं नये पन्ने उलट रहे हैं रहस्यमयी किताब के, मुख़्तलिफ़ मुलाक़ातें करवा रहे हैं खुद अपने ही आप से कहाँ छुपे थे तुम…शायद किसी से डरे हुए थे तुम; क्या सही वक्त का इंतज़ारContinue reading “अधूरा मैं”

सुकून के धीमे पल

याद हैं मुझे सुकून के ये धीमे पल, तसव्वुर में हो जाये जैसे एक हसीन ख़्वाब शामिल थके ज़हन पर मरहम सा बहता एक सर्द सफ़ेद कोहरा, और याद आ जाये बीती जवानी का एक बज़्म ए यारां ॐ अल्लाह हू जब गूंजें एक साथ… ॐ अल्लाह हू जब गूंजें एक साथ, और पुरसुकूँ सजदेContinue reading “सुकून के धीमे पल”