मोहब्बत

जन्नत देखूँगा ये सोच के घर से निकला था; नयी मोहब्बत ढूँढूँगा ये सोच के घर से निकला था

जन्नत देखूँगा ये सोच के घर से निकला था; नयी मोहब्बत ढूँढूँगा ये सोच के घर से निकला था

तुझे भूल जाऊँगा; बेवफ़ा हो जाऊँगा

पर ये तेरी ही मीठी साज़िश है; हाँ, ये तेरी ही मीठी साज़िश है

की राहें बदल गयीं; मोड़ मुड़ गये और दर पे तेरे हम फिर आ गए

अब, दिल को सुकून तो मेरे भी है; अब, दिल को सुकून तो मेरे भी है;

सच है मोहब्बत तुझसे मुझे अब भी है

Published by Gaurav

And one day, it flowed, and rescued me!

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