तुम्हारे जाने के बाद

कुछ मासूम पल याद आये आज तुम्हारे जाने के बाद  एक उम्र पहले दिखे थे तुम…एक उम्र पहले दिखे थे तुम आज मिले भी तो गुज़र जाने के बाद? सच है की भूला नहीं था मैं तुम्हें…सच है की भूला नहीं था मैं तुम्हें… आज याद तो मग़र तुम आए भूल ही जाने के बाद  ख़फ़ा ख़ुद से हों या ज़िंदगी से…सज़ा दें तो किसे दें ख़फ़ा ख़ुद से हों या ज़िंदगी से…सज़ा दें तो किसे दें …मुजरिम ढूँढ रहे हैं सब खो जाने के बाद  ये लफ़्ज़ पहुँचेंगे तुम तक, ये सोच कर तसल्ली दे रहे हैं ख़ुद को… ये लफ़्ज़ पहुँचेंगे तुम तक, ये सोच कर तसल्ली दे रहे हैं ख़ुद को…वहम का सहारा ले रहे हैं हक़ीक़त ख़त्म हो जाने के बाद   और कितने पलों पे रोएँगे, सब बह जाने के बाद 

वो मकाँ

मेरी छोटी ख़ुशियों और बड़े सहम का निगहबाँ, वो मेरी उम्र का मकाँ किसी बचपन को फिर जवाँ करता…किनहि पलों की उम्र फिर दराज़ करता वो चुप सा मकाँ जवाँ हसरतों और बूढ़े तवककों का गवाह वो छोटा सा, बड़ा मकाँ अपनी सासों को रोके हुआ, वो ज़िंदा सा मकाँ आज भी मुझे पहचानता, बड़ेContinue reading “वो मकाँ”

यादगार पल

सुन के तुम्हें आज एक बोझिल अहसास हुआ, सुन के तुम्हें आज एक बोझिल अहसास हुआ, एक उम्र के ज़ाया होने का मलाल हुआ सुन के तुम्हें आज एक बोझिल अहसास हुआ, एक उम्र के ज़ाया होने का मलाल हुआ पहचान तो अपनी बरसों की है, पहचाना तुम्हें मैंने आज ही है पल कोई यादContinue reading “यादगार पल”

विश्व तीर्थ

क्यूँ कर जाऊँ मैं काशी द्वारका हरिद्वार , क्यूँ करूँ तीर्थ मैं जीवन में बस एक बार क्यूँ कर जाऊँ मैं काशी द्वारका हरिद्वार , क्यूँ करूँ तीर्थ मैं जीवन में बस एक बार विश्वास भक्ति करुणा की नित्य है पुकार; विश्वास भक्ति करुणा की नित्य है पुकार, नित्य ही कैसे तीर्थ हो आऊं औरContinue reading “विश्व तीर्थ”

मेघ कान्हा

मेघ धरा लिप्त हैं आज मिलन ऋतु की वर्षा में, झूम रहीं हैं वृक्ष गोपियाँ कान्हा के प्रेम की बरखा में मेघ धरा लिप्त हैं आज मिलन ऋतु की वर्षा में,झूम रही हैं वृक्ष गोपियाँ कान्हा के प्रेम की बरखा में तपती विरह का अंत है आज, हर रूठी गोपी कान्हा में लिप्त है आज,Continue reading “मेघ कान्हा”

अनगिनत तारों का क़स्बा

क़स्बा है एक, दो बसों के सफ़र दूर, पहुँचते ही जहां मैं जाया करता था बेहद रूठ ना पहाड़, ना समुंदर, ना जंगल…बीती हैं बचपन की छुट्टियाँ करते मच्छरों से दंगल धूल, गोबर और कूड़ा…बचते बचाते चलो नहीं तो सन जाओगे पूरा बल्ब और पंखों की सदा थी गर्मियों की छुट्टी…कभी क़भार आ के बिजलीContinue reading “अनगिनत तारों का क़स्बा”